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🕉️एपिसोड 69 — स्वामी निरंजनजी पॉडकास्ट | कठोपनिषद् - October 3, 2025🕉️ 🕉️एपिसोड 69 — स्वामी निरंजनजी पॉडकास्ट | कठोपनिषद् - October 3, 2025🕉️
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🕉️एपिसोड 69 — स्वामी निरंजनजी पॉडकास्ट | कठोपनिषद् - October 3, 2025🕉️
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कठोपनिषद्
प्रथमोध्याय — तृतीय वल्ली
हे नचिकेता! तुम जीवात्मा को तो रथ का स्वामी - उसमें बैठकर चलने वाला समझो, और इस शरीर को ही रथ समझो, तथा बुद्धि को इस रथ का सारथी (रथका चलाने वाला समझो) और मन को ही लगाम समझो।
ज्ञानी जन इस प्रकार इन्द्रियों को रथ के घोड़े बतलाया है, और विषयों को उन घोड़ों के विचरने का मार्ग बतलाया है। तथा शरीर, इन्द्रिय और मन इन सबके साथ रहने वाला अविद्या युक्त जीवात्मा को ही कर्ता बतलाते हैं।
जीवात्मा यदि बुद्धि सारथी को सद् मार्ग पर चलने की प्रेरणा करता तो वह शीघ्र परमधाम पहुँच जाता। परन्तु वह सांसारिक नाम-रूप तथा यह मैं-मेरा के माया जाल में फंस कर बुद्धि को सद् प्रेरणा देना भूलगया। जिससे बुद्धि रूपी सारथी असावधान होकर मन रूपी लगाम को ढीला छोड़ दिया। जिसके फल स्वरूप दुष्ट बलवान इन्द्रियाँ रूप घोड़े सांसारिक शब्द, रूप, रस तथा गन्ध विषयों में भटक विषय-विष का पान कर अत्यन्त दुःख को प्राप्त हो रहा है।
परन्तु जो मनुष्य विवेकशील बुद्धि रूप सारथी से सम्पन्न और मनरूप लगाम को वश में रखने वाला है, वह सांसारिक मार्ग के पार पहुँचकर परब्रह्म पुरुषोत्तम को प्राप्त कर लेता है, जहाँ से फिर लौटना नहीं होता।
~ वेदान्त केशरी स्वामी निरंजनजी महाराज
उपनिषद् सिद्धान्त एवं वेदान्त रत्नावली
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Release Date: 03/10/2025, 19:11:08