सूरूर-से धीरे-धीरे चढ़ते नशीले ट्रैक्स।
दिव्य कुमार की उत्साही आवाज़ में “मस्तों का झुंड’’ की सिग्नेचर फ़ौजी म्यूज़िक से हंगामा करिये या फिर “Slow Motion अंग्रेज़ा’’ पर ज़ोरों से कमर थिरक़ाइए, क्यूंकि शंकर-एहसान-लॉय के इन गानों को नज़रअंदाज़ करना कठिन है। “गुरबानी’’ के रूहानी ठहराव से लेकर “ज़िंदा’’ की इलेक्ट्रॉनिक बीट्स पर गिटार की मनमोहक ख़राशों तक यह ऐल्बम एक आकर्षक पैकेज है। माडर्न-सूफ़ी गाने “मेरा यार’’ को जावेद बशीर के उन्मत्त स्वर इश्क़ की गहराईयों में डुबोते हैं, तो “ओ रंगरेज़’’ को गीतकार प्रसून जोशी रूमानी बोलों में पिरोते हैं।